Khetlawas

धर्म से ज़्यादा तो कर्म महत्वपूर्ण है
           क्योंकि धर्म करके तो
        भगवान से माँगना पड़ता है
           जबकि कर्म करने से
     भगवान को ख़ुद को देना पड़ता हैं

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